Yug Pravakta

भूमिका:- विकास का चक्र तेजी से चल रहा है। विज्ञान के चमत्कारों और नित नई खोजों ने मानव जाति को सुख-सुविधाओं के ढेर पर बिठा दिया है। उपभोगवादी जीवन शैली के परिणामस्वरूप जन मानस स्वार्थ लिप्सा के दलदल में फँसा जा रहा है। त्याग, परोपकार तो उसकी पहुँच से दूर ही हो गए हैं। आदर्श और सिद्धांतों का ढोल पीटते तो बहुत दिखाई देते हैं, परंतु आचरण में उतारने को कम ही लोग तैयार रहते हैं। विज्ञान ने अपना पौरूष दिश दिया है। पर अध्यात्म उसी तुलना में पिछड़ता नजर आ रहा है। परिणाम सामने है। मानवीय मूल्यों और आदर्शों की उपेक्षा से समाज अनास्था के गहरे अंधेरे में घुसा जा रहा है। ऐसे समय में स्मरण हो आता है, प्राचीन साधु और ब्राह्मणों का जो वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिता का उद्घोष करते हुए राष्ट्र को जीवंत और जाग्रत बनाए रहते थे।
परम पूज्य गुरूदेव ने वर्तमान समय के प्रबुद्धों से धर्म तंत्र को संभालने की अपील की है। अस्तु, राष्ट्र के भावनाशील और समयदानी प्रतिभाशालियों को संगठित कर तथा प्रशिक्षित कर उनके माध्यम से तथ्य, तर्क और प्रमाणों के आधार पर भौतिक जगत में अध्यात्मवादी प्रतिपादन हेतु युग निर्माण मिशन से जुड़े भावनाशील वैज्ञानिकों, प्रबुद्धों, प्रखर वक्ताओं को तलाशा और तराशा जा रहा है।

लक्ष्य - विषयवस्तु विशेषज्ञों के माध्यम से महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, कॉर्पोरेट जगत, वैज्ञानिक वर्ग, तकनीकि वर्ग, प्रशासक वर्ग, राजनीतिक वर्ग आदि प्रबुद्ध वर्ग के व्यक्तियों के बीच युग संदेश पहुँचाना।

कार्यक्षेत्र - प्रांतीय स्तर पर कार्य करेंगे तथा आवश्यकतानुसार, केंद्र के निर्देश पर अन्य क्षेत्रों में भी कार्य कर सकेंगे।

अहताए/अपेक्षाएँ:-
  • नियमित उपासना साधना, 
  • नियमित स्वाध्याय, 
  • विषयवस्तु का उत्तम ज्ञाता, 
  • कुशल व संयमित वक्ता, 
  • मिशन की विचारधारा व गतिविधियों का अच्छा जानकार, 
  • समर्पित कार्यकर्ता, 
  • यथोचित शैक्षणिक योग्यता, 
  • प्रबुद्ध वर्ग में विचार संपे्रषण में सक्षम, 
  • शिक्षण की विविध प्रणालियों यथा पीपीटी प्रोजेक्टर आदि का चालनज्ञान, 
  • आवश्यकतानुसार समयदान कर सकने की स्थिति, 
  • भारतीय वेशभूषा को प्राथमिकता,
  • अपने क्षेत्र में प्रभावी जनसंपर्क, 
  • वाणी एवं लेखनी में पवीणता।
कार्य:- 
  • अपने क्षेत्र में सहयोगियों की टीम तैयार करना, 
  • अपने-अपने क्षेत्र में विविध विषयों पर कार्यशालाएं/संगोष्ठियों, 
  • सभाओं का आयोजन करना, 
  • युवा वर्ग में युग निर्माण का संदेश देने हेतु महाविद्यालयों/विश्वविद्यालयों/कॉर्पोरेट जगत से संपर्क कार्यक्रम, 
  • विविध विषयों पर अद्यतन जानकारी युक्त विषय वस्तु पर पीपीटी/लेक्चर बनाना, 
  • केंद्र के सतत संपर्क में रहना एवं मिशन की मूल विचारधारा से जुड़े रहना, 
  • सनातन सूत्रों को नई शैली में प्रस्तुत करना, 
  • लोक जागरण के लिए जन सम्मेलन करना, 
  • पर्व उत्सवों को प्रगतिशील स्वरूप प्रदान कर धर्म प्रचार का साधना बनाना, 
  • बाल-संस्कारशालाओं का संचालना करना/कराना, 
  • नवनिर्माण के आलोक वितरण हेतु लेखन कला को विकसित करना, 
  • क्षेत्र के स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रज्ञा आंदोलन विषयक विचारों को स्थान दिलाने का प्रयास करना, 
  • अपने जैसी योग्यता वाले प्रशिक्षक तैयार करना, 
  • एसएमएस/मेल द्वारा सद्वाक्यों श्रेष्ठ विचारों के प्रसारण की योजना बनाना, 
  • लोकल टी०बी० चैनलों में युग प्रवाह आदि के प्रसारण की व्यवस्था बनाना।
कार्य पद्धति:- युग प्रवक्ता केंद्रीय जोनल कार्यालय के सहयोग से क्षेत्र में कार्यक्रम निश्चित करेंगे अथवा केंद्र संगठन के माध्यम से कार्यक्रम तय करेगा तथा युग प्रवक्ता को केंद्रीय प्रतिनिधि के रूप में कार्यक्रम संचालन हेतु प्रतिनियुक्त करेगा।