मातृ शक्ति श्रद्धांजलि नवसृजन समारोह

मातृ शक्ति श्रद्धांजलि नवसृजन समारोह  
( श्रावणी पर्व 26 अगस्त 2018 से माताजी के जन्मशताब्दी 2026 तक )

कार्यक्रम का स्वरूप:-
एक दिन, एक समय, विभिन्न स्थानों पर एक साथ सामूहिक एक कुण्डीय यज्ञो का आयोजन|
यज्ञ का आयोजन आप अपने क्षेत्रीय स्तर पर साप्ताहिक या मासिक गतिविधियों के रूप में कर सकते है |
इस कार्यक्रम की पूर्णाहुति माताजी के जन्मशताब्दी समारोह में सामूहिक रूप से दी जायेगी |

कार्यक्रम के तीन चरण :
प्रयाज :- यज्ञ से पूर्व प्रक्रिया - जन सम्पर्क, परिजनों से सम्पर्क, स्थान का चयन इत्यादि व्यवस्था |
याज:- यज्ञीय कार्यक्रम का आयोजन |
अनुयाज :- सामूहिक दीपयज्ञ कार्यक्रम , मंडलों का निर्माण , साप्ताहिक स्वाध्याय एवं गतिविधियों का प्रारम्भ व संचालन |

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AWGP VOLUNTEER एवं AWGP KARMAKAND MOBILE APP इस कार्यक्रम में आपको सहयोग करेंगे


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  • यज्ञ, दीपयज्ञ, त्यौहारो, संस्कारो, पूजन एवं विभिन्न साधना पद्धतियों के मंत्र, अर्थ, विधि, सन्दर्भ का संकलन.
  • मंत्रो के शुद्ध उच्चारण जानने के लिए ऑडियो की भी व्यवस्था हैं।
ऐसे करें हवन - Practical video of Hawan ..... Yagya Karamkand | Gayatri Pariwar | Shantikunj Haridwar



Yagya Karmakand Shri Pt. Chandra Bhushan Mishra @ Gayatri Pariwar Shantikunj Haridwar



मातृ शक्ति श्रद्धांजलि नवसृजन महापुरश्चरण 
‘‘गृहे- गृहे गायत्री यज्ञ अभियान’’ 
अयं यज्ञो विश्वस्य भुवनस्य नाभिः (अथर्ववेद ९. १५. १४)  (यह यज्ञ ही संसार चक्र की धुरी है) 

  विश्व की प्रथम एवं श्रेष्ठतम संस्कृति के माता- पिता गायत्री और यज्ञ है । 
युग ऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं स्नेह सलिला वन्दनीया माताजी भगवती देवी शर्मा ने अपने विचार क्रांति अभियान में यज्ञ को लोक शिक्षण का आधार बनाया है। व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र में छाई विकृतियों प्रथा मूढ़ मान्यताओं के निवारण एवं मानव मात्र में श्रेष्ठताओं के संवर्धन में विगत ७० वर्षो में गायत्री परिवार ने आशातीत सफलता पाई है। 
स्वच्छ मन, स्वस्थ शरीर और सभ्य समाज के निर्माण हेतु आध्यात्मिक मूल्यों के शिक्षण का सफल प्रयोग यज्ञ के माध्यम से ही सम्पन्न हुआ है। व्यक्तिगत पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन मे सुख,शांति, प्रगति एवं समृद्धि को प्राप्त करने हेतु युग ऋषि ने यज्ञीय जीवन जीने की प्रेरणा दी है। 
      यज्ञ का शाब्दिक अर्थ त्याग परोपकार दान, देव पूजन एवं संगतिकरण होता है। लेन- देन का यज्ञीय चक्र सारे संसार में प्रकृति में चलता दिखाई देता है। इसी कारण वेदों ने यज्ञ को भुवन की नाभि माना है । 
      वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी हेतु प्रारंभ होने वाले ९ वर्षीय नवसृजन महापुरश्चरण के अंतर्गत गृहे- गृहे गायत्री यज्ञ अभियान मुख्य आधार बनेगा। 
      एक दिन एक साथ एक कॉलोनी अथवा ग्राम में ११,२४, ५१,या १०८ घरों में गायत्री यज्ञ का आयोजन इन दिनों म.प्र. के अनेक जिलों मे प्रारंभ हुआ हैं। यह एक अनूठा प्रयोग है जिसे राष्ट्र व्यापी बनाने की आवश्यकता है। 
इसी की पूर्ति हेतु एक व्यवस्थित प्रक्रिया प्रस्तुत की जा रही है। देश की सभी शक्तिपीठ/ प्रज्ञापीठ एवं मण्डल इसे प्रारंभ कर मनुष्य मे देवत्व एवं धरती पर स्वर्ग के अवतरण की अवश्यंभावी प्रक्रिया को सफल बनाने मे अपना योगदान प्रस्तुत करेंगे ऐसा विश्वास है। 

गृहे- गृहे गायत्री यज्ञ अभियान की क्रिया विधि 
१. प्रयाज:- 
A. शक्तिपीठ/ प्रज्ञापीठ/ मण्डल को कार्यक्रम के व्यवस्थित संचालन हेतु केन्द्र बनालें। 
B. क्षेत्र की आवश्यकता एवं संभावना अनुसार यज्ञ कर्मकाण्ड कराने वाले कार्यकर्ता चिन्हित करलें आवश्यक होने पर उनका एक या दो दिन का प्रशिक्षण संपन्न किया जा सकता है। 
C. समय,स्थान का निर्धारण:- कार्यक्रम रविवार के दिन प्रात: ९.३० से १२.३० के बीच सम्पन्न होगा। अत: दिनांक निश्चित कर लें। 
- एक दिन एक समय अलग- अलग घरों में यज्ञ हेतु किसी कालोनी अपार्टमेंट अथवा ग्राम का चयन करें। 
- कॉलोनी या क्षेत्र मे एक प्रमुख स्थल का निर्धारण जैसे मंदिर, गार्डन, क्लब, कम्यूनिटी हॉल इत्यादि। जहाँ से कार्यक्रम संचालन होना है का चयन कर अनुमति प्राप्त करलें। 
- कॉलोनी और आस- पास के क्षेत्र मार्ग का निर्धारण (रैली हेतु )पूर्व से ही तय करलें। 

D. जन संपर्क एवं पूर्व तैयारियाँ। 
जन संपर्क- जिस भी कॉलोनी मे यज्ञ कराना है, वहाँ पर घर- घर जाकर, प्रत्येक घर में व्यक्तिगत रूप से संपर्क करें तथा जिन परिवारो की सहमति मिलती है, उनका नाम, पूरा पता (मकान नं.), फोन नं. नोट कर लें। और उन्हे यज्ञ के लिये क्या तैयारियाँ करनी है, भी बता दें। जैसे पूजा घर की सफाई, पूजा की थाली सजाकर रखना और यदि कोई संस्कार करवाना हो, तो आवश्यकता अनुसार निर्देश दें निर्धारित स्थल, दिनांक और समय भी बता दें जहाँ सभी याजक व आचार्यों को एकत्रित होना है। 

- संपर्क सूचि तैयार करना :- क्षेत्रिय कार्यकर्ता द्वारा सहमत यजमानों की सूची (नाम, पूरा पता, फोन नं.) और दो स्थानीय कार्यकर्ता (co-ordinator) के नाम, फोन नं. सहित, तैयार का संचालन केन्द्र को देदें। 
- पूजन किट तैयार करना:- शक्तिपीठ पर स्वयं सेवी कार्यकर्ताओं द्वारा पूजन किट तैयार की जाये। जिसने निम्नलिखित सामग्री हो 
(१) देव स्थापना का चित्र। 
(२) हवन सामग्री व समिधा के २ पैकेट। 
(३) यज्ञ कुण्ड। 
(४) २ सुपारी, कलावा। 
(५) गायत्री चालीसा व मंत्र लेखन। 
(६) गायत्री मंत्र व सद्वाक्य स्टीकर। 
(७) बलिवैश्व यज्ञ स्टीकर। 
(८) साहित्य - पॉकेट बुक्स। 
(९) शक्तिपीठ की सभी गतिविधियों व प्रमुख पर्वों की जानकारी सहित आमंत्रण पत्र। 
(१०) पत्रक –(१) यजमान व उनके परिवार का विवरण प्राप्त करने हेतु पत्रक 
             (२) याजक का नाम, पता की स्लीप- 
            (३) यज्ञाचार्य का नाम 
            (4) प्राप्त दान राशि और हस्ताक्षर वाली परची 
(२) याज :- कार्यक्रम का आयोजन: 
- जन जागरण रैली प्रात: 
सभी याजक व आचार्य गण कॉलोनी के निर्धारित स्थल पर प्रात: ९ बजे एकत्रित हों। सभी मिलकर निर्धारित मार्ग पर संक्षिप्त जन जागरण रैली कलश यात्रा जिसमें हमारी वार्षिक कार्य योजना के अनुसार- वर्षा ऋति मे वृक्ष कावड़ यात्र, शीत ऋतु मे साहित्य को  सिर पर धारण कर यात्रा और ग्रीष्म ऋतु मे कुरीति व नशा उन्मूलन के संदेश नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संक्षिप्त जन जागरण रैली का आयोजन करें। 
- देव पूजन, दिशा निर्देश व घरो में यज्ञ हेतु प्रस्थान छोटा सभी रैली/ कालश यात्रा समापन के पश्चात निर्धारित स्थल पर पहुँचें है, जहाँ एक देव मंच, एक काऊन्टर टेबल, और याज्ञक व आचार्यों की अलग- अलग बैठक व्यवस्था होती है। 
- देव पूजन के बाद सभी को स्पष्ट दिशा निर्देश दिये जाएँ। तत्पश्चात् एनाऊंसमेंट होने पर प्रत्येक याजक एक आचार्य को पूजन कीट के साथ घर ले जायँ। यज्ञ के पश्चात् दिशानिर्देश अनुसार यजमान की संपूर्ण जानकारी दिए गये पत्रक, मे भर ले तथा प्राप्त दान राशि को दान में स्लीप में भर कर यजमान के हस्ताक्षत सहित काऊन्टर टेबल पर आचार्यो द्वारा जमा किये जायें। 
- भोजन प्रसाद- निर्धारित स्थल पर यज्ञ संपन्न होने के बाद सम्भव हो तो सामूहिक रूप से सभी कार्यकर्ताओं हेतु अमृतासन की व्यवस्था बना लें। 
अनुयाज :- चतुर्थ चरण- अनुदान रसीद व धन्यवाद पत्र और समीक्षा 
- प्रत्येक यज्ञ के बाद , आय- व्यय की जानकारी प्रज्ञापीठ पर देदें। तत्पश्चात् अनुदान रसीद व धन्यवाद पत्र शक्तिपीठ द्वारा जारी किया जायेगा। 
- इसके बाद क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं द्वारा यजमानों से सम्पर्क कर अनुदान रसीद व धन्यवाद पत्र उन्हे सोंपे तथा कार्यक्रम के अनुभव जानें। उन्हे अपने केन्द्र पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की जानकारी दें। उन्हें आमंत्रित भी करें। 

अंतिम चरण- अनुयाज क्रम: 
(१) सामूहिक दिपयज्ञ आयोजन 
(२) मंडलों का गठन। 
(३) साप्ताहिक स्वाध्याय एवं यज्ञ का क्रम बनाना। 
उसी माह के अंत मे अनुयाज कार्यक्रम के अंर्तगत सामूहिक दीपयज्ञ के माध्यम 
से मिशन मे चल रही सभी गतिविधियों व प्रमुख पर्व से अवगत कराया जाता है। 
साथ ही मंडलों का गठन कर साप्ताहिक गतिविधियों (सत्संग, स्वाध्याय आदि) के लिए प्रेरित किया जाये। और उस क्षेत्र मे सक्रिय वरिष्ठ कार्यकर्ता (दो भाई या बहन) को मंडलों के पोषण की जिम्मेदारी दी जाये। 
- इस प्रकार व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण से समाज निर्माण की कार्य योजना को मूर्तरूप देने हेतु अभियान वन्दनीया माता जी की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित नौ वर्षीय 
‘‘मातृशक्ति श्रद्धांजलि नवसृजन महापुरश्चरण " मे एक सार्थक श्रद्धांजलि होगी। 

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